नाना पाटेकर ने ठुकराई 1.5 करोड़ की कार, किसानों को दिए लाखो रुपए?

नाना पाटेकर बॉलीवुड में सिर्फ अपने दमदार अभिनय के लिए ही नहीं, बल्कि बेबाक और गुस्सैल अंदाज के लिए भी जाने जाते हैं। पर्दे पर उनका सख्त अंदाज़ और ऑफ-स्क्रीन उनके गुस्से से जुड़े किस्से अक्सर चर्चा में रहे हैं। लेकिन क्या नाना पाटेकर की असली शख्सियत भी उतनी ही सख्त है, जितनी लोगों की धारणा बन चुकी है? अब लेखक और स्क्रीनराइटर रणबीर पुष्प ने नाना पाटेकर को लेकर कुछ ऐसा बताया, जो उनकी एक बिल्कुल ही अलग तस्वीर सामने रखता है। The Times of India की रिपोर्ट के मुताबिक, रणबीर पुष्प ने नाना पाटेकर को लेकर कहा कि लोगों ने उनके बारे में एक धारणा बना रखी है, जबकि वो उन्हें एक संवेदनशील और मददगार इंसान के तौर पर देखते हैं। पुष्प ने नाना के एक पुराने किस्से का जिक्र करते हुए बताया कि कैसे उन्होंने करीब 1.5 करोड़ रुपये की लग्जरी कार खरीदने की जगह उस पैसे को किसानों और उनके परिवारों की मदद में लगाने का फैसला किया था।

1.5 करोड़ की कार और फिर बदल गया फैसला

रणबीर पुष्प के मुताबिक, नाना पाटेकर के पास करीब 1.5 करोड़ रुपये थे, जिनसे वो एक लग्जरी कार खरीदने वाले थे। लेकिन किसानों की खराब स्थिति और किसान परिवारों की परेशानियां देखने के बाद उन्होंने अपना फैसला बदल दिया। हालांकि, इस कहानी की पृष्ठभूमि नाना के लंबे समय से चले आ रहे किसान सहायता कार्यों से जरूर जुड़ती है। नाना पाटेकर खुद भी पहले किसानों की मदद के लिए अपनी निजी रकम इस्तेमाल करने की बात बता चुके हैं। The Telegraph के 2015 के एक इंटरव्यू में उन्होंने बताया था कि उन्होंने लग्जरी कार के लिए करीब 1.5 करोड़ रुपये अलग रखे थे, लेकिन किसान परिवारों की हालत देखने के बाद उस पैसे को उनकी मदद के लिए देने का फैसला किया। 2016 में Governance Now को दिए इंटरव्यू में भी नाना ने बताया था कि उनके पास करीब 1 से 1.5 करोड़ रुपये थे और उन्होंने अपने दोस्त मकरंद अनासपुरे से किसानों के उन परिवारों तक पैसा पहुंचाने के लिए कहा था, जिन्होंने अपने परिवार का कमाने वाला सदस्य खो दिया था। यानी हालिया खबर में सामने आया किस्सा पूरी तरह नया नहीं है। इसका एक पुराना संदर्भ नाना पाटेकर के अपने बयानों में भी मिलता है।

किसानों की मदद से शुरू हुई NAAM Foundation

किसानों की स्थिति को लेकर नाना पाटेकर का काम सिर्फ व्यक्तिगत मदद तक सीमित नहीं रहा। नाना पाटेकर और मराठी एक्टर मकरंद अनासपुरे ने सितंबर 2015 में NAAM Foundation की शुरुआत की थी। NAAM Foundation की आधिकारिक वेबसाइट के मुताबिक, इस पहल की शुरुआत महाराष्ट्र में सूखे, किसान आत्महत्याओं और पानी के संकट जैसी समस्याओं के बीच हुई थी। संस्था का फोकस सिर्फ आर्थिक मदद देने पर नहीं, बल्कि गांवों के विकास, पानी के बेहतर इस्तेमाल, जलस्रोतों को पुनर्जीवित करने और किसानों को ज्यादा टिकाऊ तरीके से मदद करने पर भी रहा है। Foundation की official website पर नाना पाटेकर को Chairman और मकरंद अनासपुरे को Secretary बताया गया है। यानी 1.5 करोड़ रुपये वाला किस्सा अगर सिर्फ एक कार छोड़ने की कहानी मानकर देखा जाए तो तस्वीर अधूरी रह जाती है। इसके पीछे नाना पाटेकर की किसानों से जुड़ी वह लंबी पहल भी है, जो बाद में एक संस्था के रूप में आगे बढ़ी।

नाना पाटेकर के गुस्से को लेकर भी बोले रणबीर पुष्प

रणबीर पुष्प ने न सिर्फ नाना की दरियादिली पर बात की, बल्कि उनके गुस्से को लेकर बनी धारणा पर भी अपनी राय रखी।

नाना पाटेकर के गुस्सैल स्वभाव के किस्से पुरे बॉलीवुड में काफी पुराने हैं। The Times of India की रिपोर्ट में भी 1989 की फिल्म Parinda के दौरान निर्देशक विधु विनोद चोपड़ा के साथ कथित विवाद का जिक्र किया गया है। लेकिन रणबीर पुष्प का कहना है कि नाना को सिर्फ उनके गुस्से या सख्त व्यवहार से जज करना सही नहीं है। पुष्प ने एक और किस्सा सुनाया, जिसमें नाना ने कथित तौर पर सड़क पर प्लास्टिक की बोतल फेंकने वाले एक व्यक्ति को रोककर उसे सफाई और नागरिक जिम्मेदारी का मतलब समझाया। उनके मुताबिक, नाना का गुस्सा कई बार किसी इंसान को नुकसान पहुंचाने के लिए नहीं, बल्कि गलत चीज के खिलाफ होता है। यह किस्सा भी रणबीर पुष्प के बयान के तौर पर ही सामने आया है।

पर्दे का गुस्सा या असल जिंदगी का इंसान?

शायद यही वजह है कि रणबीर पुष्प ने नाना पाटेकर की छवि को लेकर लोगों की धारणा पर सवाल उठाया। एक एक्टर का पर्दे पर सख्त दिखना और असल जिंदगी में भी वैसा ही होना, ये जरूरी नहीं है। नाना पाटेकर ने अपने करियर में कई ऐसे किरदार निभाए हैं, जिनमें उनका गुस्सा, आक्रामकता और तीखा अंदाज साफ दिखाई देता है। शायद धीरे-धीरे वही छवि उनकी निजी जिंदगी से भी जोड़ दी गई। लेकिन दूसरी तरफ किसानों के लिए उनका काम, NAAM Foundation से जुड़ी उनकी भूमिका और जरूरतमंद परिवारों की मदद के पुराने किस्से उनकी शख्सियत का एक दूसरा पहलू दिखाते हैं। Indian Express ने भी हालिया रिपोर्ट में 1.5 करोड़ रुपये की लग्जरी कार छोड़कर उस रकम को किसानों के परिवारों की मदद के लिए देने वाली बात को रणबीर पुष्प के हवाले से रिपोर्ट किया है।

किसी इंसान को सिर्फ उसकी छवि से नहीं, उसके काम से भी देखना चाहिए

नाना पाटेकर को लेकर सामने आया ये किस्सा इसलिए भी दिलचस्प है क्योंकि ये एक बड़े सवाल की तरफ इशारा करता है—क्या हम किसी इंसान को उसकी बनी-बनाई छवि के आधार पर पहचानने लगते हैं? 

रणबीर पुष्प का दावा है कि नाना पाटेकर को लेकर लोगों की धारणा उनके वास्तविक व्यक्तित्व की पूरी तस्वीर नहीं दिखाती। वहीं नाना का किसानों के लिए लंबे समय से चला आ रहा काम भी रिकॉर्ड पर मौजूद है। NAAM Foundation की official जानकारी और नाना के पुराने इंटरव्यू इस सामाजिक पहल की पुष्टि करते हैं। आखिरकार, किसी अभिनेता की फिल्मों के किरदार और उसकी निजी जिंदगी को एक ही नजर से देखना शायद सही नहीं होगा। नाना पाटेकर का गुस्सा लोगों को याद रहता है, लेकिन किसानों के लिए किया गया उनका काम भी उनकी कहानी का उतना ही महत्वपूर्ण हिस्सा है। और शायद यही इस पूरे किस्से की सबसे दिलचस्प बात है—कभी-कभी किसी इंसान की सबसे तेज आवाज भी उसके बारे में पूरी कहानी नहीं बताती।

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