जब नाना पाटेकर ने कहा था—कल का क्या पता! निधन से पहले कही बात हुई चर्चा में

नाना पाटेकर के निधन से कुछ दिन पहले का एक वीडियो सामने आया है, जिसमें वह जिंदगी, अपने अधूरे कामों और दूसरों के लिए कुछ करने की जरूरत पर बात करते नजर आए। अभिनय के साथ क्रिकेट से भी उनका खास लगाव रहा। फिल्मों में अपने दमदार डायलॉग और बेबाक अंदाज से पहचान बनाने वाले नाना पाटेकर की जिंदगी का सफर अब थम चुका है। 8 अक्टूबर 2026 को 75 साल की उम्र में उनके निधन की खबर आई, तो फिल्म इंडस्ट्री से लेकर उनके चाहने वालों तक हर कोई दुखी हो गया। इसी बीच गोवा में उनके आखिरी सार्वजनिक कार्यक्रम का एक वीडियो भी चर्चा में आ गया। इसमें नाना जिंदगी की अनिश्चितता पर बात करते हुए कहते हैं कि आज वह यहां हैं, लेकिन कल रहेंगे या नहीं, यह कोई नहीं जानता। उनके जाने के बाद उनकी यह बात लोगों को भावुक कर रही है।

    Nana Patekar (photo credit:- social media)


निधन से पहले कही थी ये बात

नाना पाटेकर 4 अक्टूबर को गोवा के डोना पाउला में Samraat Club International के एक कार्यक्रम में शामिल हुए थे। उस दिन वह अपने चिर-परिचित अंदाज में नजर आए। उन्होंने वहां मौजूद लोगों से बातचीत की, स्थानीय कलाकारों के साथ समय बिताया और गोवा के पारंपरिक वाद्य यंत्र शमेल को बजाने की कोशिश भी की। कार्यक्रम में उनके नाचने और कलाकारों के साथ घुलने-मिलने के वीडियो भी सामने आए। इसी दौरान उन्होंने जिंदगी को लेकर अपनी सोच साझा की। नाना ने कहा कि हर इंसान को एक दिन इस दुनिया से जाना है। उन्हें खुद भी नहीं पता कि वह अगले दिन यहां होंगे या नहीं। इसलिए जब तक जिंदगी है, तब तक यह सवाल खुद से पूछना चाहिए कि हम जो करना चाहते हैं, उसके लिए कोशिश कर रहे हैं या नहीं। उनकी बात का एक अहम हिस्सा दूसरों के लिए कुछ करने से जुड़ा था। उन्होंने कहा कि जिंदगी सिर्फ अपने परिवार और अपने दायरे तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। इंसान को समाज के लिए भी कुछ करना चाहिए, क्योंकि दुनिया से जाते समय वह अपने साथ कुछ लेकर नहीं जाता। नाना के निधन के बाद उनका यह बयान फिर चर्चा में है। उस समय यह जिंदगी पर उनकी सामान्य-सी बात थी, लेकिन अब उनके चाहने वाले इसे याद कर रहे हैं।

मनोहर पर्रिकर को भी किया याद

गोवा के इस कार्यक्रम में नाना पाटेकर ने अपने मित्र और गोवा के पूर्व मुख्यमंत्री मनोहर पर्रिकर का भी जिक्र किया था। उन्होंने पर्रिकर की तारीफ करते हुए कहा कि वह ऐसे व्यक्ति थे, जिन पर गर्व किया जा सकता है। नाना के मुताबिक, पर्रिकर ने अपनी जिंदगी को एक मकसद के साथ जिया और अपने काम से लोगों के बीच खास जगह बनाई। नाना की बातों में उस दिन जिंदगी के साथ-साथ जिम्मेदारी का जिक्र भी था। वह लोगों को यह समझाने की कोशिश कर रहे थे कि सिर्फ अपने लिए जीना ही काफी नहीं है। जो समय मिला है, उसमें अपने हिस्से का काम करना और दूसरों के लिए कुछ छोड़ जाना भी जरूरी है। उनके निधन के बाद इस भाषण को सुनने वाले लोगों के लिए ये बातें और मायने रखने लगी हैं।

क्रिकेट से भी था गहरा लगाव

नाना पाटेकर की पहचान एक ऐसे अभिनेता की रही, जो पर्दे पर अपने किरदार को पूरी ताकत के साथ निभाते थे। लेकिन फिल्मों के अलावा उनकी दिलचस्पी क्रिकेट में भी थी। उनके इस शौक का जिक्र कई साल पहले एक इंटरव्यू में हुआ था। Aaj Tak की 2015 की रिपोर्ट के मुताबिक, नाना ने अपने शुरुआती दिनों को याद करते हुए बताया था कि वह ऑफ स्पिन गेंदबाजी किया करते थे। आर्थिक हालात ऐसे नहीं थे कि वह आसानी से क्रिकेट की ट्रेनिंग ले सकें। ऐसे में वह मुंबई के शिवाजी पार्क जाते और वहां नेट प्रैक्टिस करने वाले बल्लेबाजों को गेंदबाजी करते थे। शिवाजी पार्क मुंबई में क्रिकेट की दुनिया से जुड़े कई खिलाड़ियों के लिए अहम जगह रहा है। नाना का वहां जाकर गेंदबाजी करना बताता है कि अभिनय की दुनिया में आने से पहले भी इस खेल से उनका जुड़ाव कितना पुराना था। उनका यह किस्सा उनके चाहने वालों के लिए इसलिए भी दिलचस्प है, क्योंकि पर्दे पर गंभीर और प्रभावशाली किरदार निभाने वाले नाना के भीतर क्रिकेट को लेकर उत्साह रखने वाला एक अलग इंसान भी था।

अभिनय में बनाई अपनी अलग पहचान

नाना पाटेकर ने मराठी थिएटर से अपने करियर की शुरुआत की और बाद में हिंदी सिनेमा में भी अपनी जगह बनाई। परिंदा, क्रांतिवीर, अग्नि साक्षी, खामोशी और वेलकम जैसी फिल्मों में उनके अलग-अलग अंदाज देखने को मिले। वह गंभीर किरदार निभाएं या कॉमेडी करें, उनकी आवाज और अभिनय का तरीका दर्शकों के बीच अलग पहचान बना लेता था। उनके करियर की खास बात यह रही कि उन्होंने सिर्फ एक तरह के किरदारों तक खुद को सीमित नहीं रखा। उनके अभिनय में गुस्सा, दर्द, बेबसी और हास्य—सब कुछ देखने को मिला। यही वजह है कि उनकी कई फिल्में आज भी दर्शकों को याद हैं। Reuters की रिपोर्ट के मुताबिक, नाना ने मराठी थिएटर से शुरुआत की थी और आगे चलकर हिंदी तथा मराठी सिनेमा के जाने-पहचाने कलाकार बने। उनके अभिनय को राष्ट्रीय और क्षेत्रीय स्तर पर सम्मान भी मिला।

यादों में रहेंगे नाना

नाना पाटेकर के निधन से सिनेमा की दुनिया ने एक ऐसे कलाकार को खो दिया, जिसकी अपनी अलग आवाज और पहचान थी। उनके आखिरी सार्वजनिक कार्यक्रम का वीडियो उनके चाहने वालों को उस दिन की याद दिला रहा है, जब वह कलाकारों के बीच मुस्कुराते, संगीत का आनंद लेते और जिंदगी पर अपनी बात रखते दिखाई दिए थे। वहीं, क्रिकेट से जुड़ा उनका पुराना किस्सा उनके व्यक्तित्व का एक और पहलू सामने लाता है। अभिनय की दुनिया में बड़ी पहचान बनाने वाले नाना के लिए जिंदगी सिर्फ फिल्मों तक सीमित नहीं थी। थिएटर, क्रिकेट और समाज के लिए कुछ करने की बात भी उनकी बातचीत का हिस्सा रही। उनकी फिल्में और उनसे जुड़े ऐसे किस्से आने वाले समय में भी दर्शकों को उनके बारे में जानने का मौका देते रहेंगे।

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